पतझड़
प्रार्थना है
खुली प्रार्थना
फ़ैल जाती जो
संकेतों संग
बादल
चिड़िया
चाँद - सी
तय
मुकाम तक
पलक भर
नींद लेता
समंदर
पतझड़ - साँझ
समा लेती
सुला देती हमें
आखिर
गति
कौन सी
बहतर
पतझड़
या
समंदर
झील के भाग्य में
धुआँ होना
होता है
तरकीबें नहीं करती
तरह - तरह की
कभी - कभी
ढोती है
सुनहरे सूरज को
कन्धों पर
नीलांचल की
तितली हो जाने से
पहले
वह
ए़क
शब्द
वचन
विषय
मंत्र वर्णन
एक
सूत
निषाद
कुलाल
जरा रहित
सिद्ध
भुवन स्वामी
वह
एक ही
व्यक्त तत्त्व
निर्विकार
अग्नि -सा
ताप
तप
रहस्य
शिवयोगी
वह
एक ही