चुपके से
खबर लेता
शुभ लक्षणों को देख
अपनी ही
आँखों का स्पर्श करता है
क्या
आसान होगा
अनंत काल तक
अजनबी धुरी के
सहारे चलना
सीधे-सीधे देखना
कहीं कुछ भी
अनैतिक नहीं
शब्दों के धोकों के साथ
पकडे जाने का डर
आखिर
विधियों के सहारे
कैसे जिया जा सकता
और
कैसे पाया जा सकता
उस अकाम अवस्था में
महानिर्वाण
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सोमवार, 12 अक्टूबर 2009
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