अधिक देखना हो
तो
बुरांश के फूल ,
महौषद कच्ची कच्ची इलायची ,
राजतामय
बदल वन देखे,
पहाडी पर लेटी
मावस की रात,
तोपों से चिपकी
अफीम की दोपहर ,
शब्द रहित गीला गीला सा
लीलामय लोक,
विलेखित स्वप्न
और अतृप्त
गर्वीला घुमाव देखे ,
अधिक देखना हो
तो
अंधे समुद्र का
जोगिया रंग देखे ।
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रविवार, 30 अगस्त 2009
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