अब क्या
कहना उससे
जो भूल चुका
अब तो
बैठा रहता है
इबादतखाने में
बुलाता
अपने खुदा को
बिखेर
कुछ दाने
मकई के
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गुरुवार, 24 सितंबर 2009
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