AMIT KALLA
कोल्हू का बैल
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
कोल्हू का बैल
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
गुरुवार, 8 अक्टूबर 2009
कोल्हू का बैल
चूक
जाता
हमशक्ल
उफ़
सूंघता
युग युग
पहाड़ी के भार तले
कोल्हू का बैल
सिर्फ
चकरी लगाता है
जानी पहचानी
आवाजाही में
तेज़ होता
वह शोर
क्या
कोई अंतर
उन फूस के
पुतलों में
मान बैठा है
जिसे वह
उपादेय रूप
ईश्वर का
पुराने पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
Agreegators
मेरे बारे में
Amit Kalla
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
फ़ॉलोअर
ब्लॉग आर्काइव
▼
2017
(1)
▼
मई
(1)
Speaking Tree, Navbharat Times 2017
►
2016
(5)
►
मार्च
(2)
►
जनवरी
(3)
►
2015
(19)
►
दिसंबर
(1)
►
जुलाई
(3)
►
जून
(15)
►
2014
(15)
►
दिसंबर
(1)
►
सितंबर
(1)
►
जुलाई
(10)
►
जून
(2)
►
मार्च
(1)
►
2013
(9)
►
नवंबर
(7)
►
जनवरी
(2)
►
2012
(50)
►
दिसंबर
(6)
►
नवंबर
(13)
►
जुलाई
(2)
►
जून
(5)
►
मार्च
(10)
►
फ़रवरी
(13)
►
जनवरी
(1)
►
2011
(87)
►
सितंबर
(4)
►
अगस्त
(2)
►
जुलाई
(6)
►
जून
(15)
►
मई
(19)
►
अप्रैल
(18)
►
मार्च
(10)
►
फ़रवरी
(6)
►
जनवरी
(7)
►
2010
(4)
►
नवंबर
(4)
►
2009
(126)
►
नवंबर
(4)
►
अक्टूबर
(20)
►
सितंबर
(71)
►
अगस्त
(21)
►
जून
(1)
►
मई
(1)
►
अप्रैल
(8)