निर्झर
अक्षर
अनजानी
देह भिगो देते हैं ,
रोम - रोम फूटते
किन्ही
बिरवों से
बन - बनकर
दाता के
सबद निरंतर
निर्झर अक्षर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
निर्झर अक्षर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
सोमवार, 16 नवंबर 2009
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
